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उड़ चलूँ मैं तो 4 कदम

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टेक्नोलॉजी का साथ ले उड़ना चाहता हूँ मैं भी निकलना चाहता हूँ मैं भी दुनिया से आगे 4 कदम करता है मेरा भी मन फ़ोन पर बात करने का करता है मेरा भी मन फ़ोन पर चैट करने क छुपकर घर के कोने में चलना पड़ रहा है फ़ोन डर है मम्मी का नहीं तो उड़ चलूँ मैं तो 4 कदम मोबाईल चलाता 1 वर्ष का बच्चा

मौका ये खुशियाँ बाँटने का

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दीपों का त्यौहार आया संग खुशियां ले आया सजी दुकानें , सजे मॉल सजे हैं घरों के आँगन घर भरे हैं मिठाई से घर भरे हैं मेवा से जगमग है चारों दिशाएं   जगमग है चारों फिजायें बहाना ये गिफ्टों का   बहाना ये खुशियों का मौका ये साफ़ सफाई का   मौका ये शुभ कार्य  का मौका है घर जाने का मौका है मेल-मिलाप का मौका ये खुशियाँ बाँटने का... आपको दीपावली की हार्दिक शुभकामनायें

नेता जी की झंडी है खाली

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नेता जी की झंडी है खाली ना जाने अब करेंगे किसकी सवारी बहुत सवारी करी नेता जी ने ना जाने अब किसकी बारी हर थाली का चखा स्वाद हर पार्टी का किया गुणगान जिधर देखा पलड़ा भारी उधर ही नेता जी की सवारी आज इनके तो कल उनके पर गद्दी नहीं जाने दी खाली नेता जी की झंडी है खाली देखते हैं अब किसकी बारी।

हमसफर

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छोड़ गए साथ हमसफर, जो किया करते थे वादा ज़िन्दगी भर का। ज़िन्दगी रह गई इक कोरे कागज़ सी, जिस पर केवल बूंदें ही रह गई स्याहि की। वक्त के खाली पन्नौं पर लिखकर अलविदा, समय दे गए लौट कर आ...

उड़ना चाहे मन बस तेरे ही संग

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उड़ना चाहे मन बस तेरे ही संग, क्यूं घेरे इसे पाब्ंधियां, क्यूं जकडें इसे बेड़ियां पांव की, जब उड़ना चाहे मन बस तेरे ही संग। क्यूं जाना चाहे बावरा उन राहों पर जो बनीं हैं आलोचनाओं के लिए। आखिर क्यूं उड़ना चाहे मन बस तेरे ही संग। बन चली हुं आज पतंग सी, जिसकी डोर है केवल तुम्हारे हाथों में,  जाना चाहे नील गगन में क्यूँकि तुम ही हो अब यादों में।

कुछ कमी है।।

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कमी है यहां उस खिलखिलाती हँसी की कमी है यहां खुशी के उन आसुंओं की। कुछ कमी है  सिकु़ड़ते लम्हों की कुछ कमी है बचपन की मासूमियत की। कमी है कुछ किस्से कहानियों की और कमी है उन गीतों के गुनगुनाने की। आज इन कोरे पन्नों को रंगने की एक इच्छा पर कमी है कुछ उन प्यारे खुशी भरे पलों की।

तमाशाबीन है यहाँ

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सड़क पर तमाशाबीन मोहोल्ले में तमाशाबीन ऑफिस में तमाशाबीन घर में तमाशाबीन लुटती रहे सड़क पर इज्जत देखते रहते हैं तमाशाबीन करता रहे कोई शहर को गंदा देखते रहते हैं तमाशाबीन ...

बस तेरा साथ हो

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बस तेरा साथ हो चाहे कोई भी बात हो साथ हम चल लेंगे मंजिल दूर हो या पास हो छोटे छोटे सुख- दुःख   मिलकर बाँटा करेंगे तुम अगर रूठ जाओ तो खुद को डाँटा करेंगे बस तू मेरे साथ हो चाहे कोई ना साथ हो साथ हम चल लेंगे   मंजिल दूर हो या पास हो...

मेट्रो की रफ़्तार से धक्के खाती जिंदगी

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मेरी ये कविता आज भी जिंदगी के सच को उडेल कर रख देती है, आशा है आप भी इसका आनंद लेंगे... मेट्रो की रफ़्तार से धक्के खाती जिंदगी कभी बसों में तो कभी ट्रैफिक में धक्के खाती जिंदगी कभी बिजली तो कभी पानी के लिए तरसती ये जिंदगी कभी डी एल तो कभी पासपोर्ट के लिए चक्कर काटती जिंदगी जीने की चाहत में चरखा बनती जिंदगी कभी बॉस तो कभी राजनेताओ के चँगुल में फसती जिंदगी कभी रफ़्तार तो कभी ज़िन्दगी से ही रास्ता भटक जाती ये जिंदगी किसी के लिए हल्की धूप तो किसी के लिए सर्दी की काली रात है ये जिंदगी किसी के लिए भ्रष्टाचार तो किसी के लिए शिष्टाचार ही है जिंदगी इस कलयुग में सिमटी सी जा रही ये जिंदगी महानगरो की धूल सी बनकर रह गयी ज़िंदगी  मेट्रो की रफ़्तार से धक्के खाती ये जिंदगी।

कुछ बाकी है तो बताना

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चेहरा तो वही है पहले वाला स्माइल भी वही है पहले वाली पर बातें अब नहीं पहले जैसी यादें अब नहीं पहले जैसी हाँ दोस्त नहीं अब पहले वाले रास्ते नहीं अब पहले वाले रास्ते बदल जाने से क्या इंसान भी बदल जाते हैं एक अच्छा खासा  इंसान पत्थर दिल कैसे बन जाता है अब कुछ बाकी हो तो बताना....

भैया मेरे वादा करो मुझसे

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तुमने ही  सिखाया हाथ पकड़ कर चलना हर जिद की पूरी, माना हर कहना मेरी हर परेशानी के सामने तुम खड़े रहे ताकि ना पड़े मुझे किसी दुःख को सहना भैया मेरे अपनी बहना की एक बात और सुनना  राखी में नहीं चाहिए मुझे कोई तोहफा ना गहना बस इतना सा वादा तुम मुझसे करना  ना पड़े किसी लड़की को किसी लड़के से डरना   मेरी  ही तरह करना उनकी तुम रक्षा क्योंकि वो भी है किसी भाई की बहना भैया मेरे वादा करो मुझसे  अब ना पड़ेगा किसी लड़की को  निर्भया की तरह मरना....

क्यों दिल ये मेरा बातें सिर्फ तेरी करता है

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क्यों दिल ये मेरा बातें सिर्फ तेरी करता है क्यों यादें ये मेरी बस याद तुझे करती है क्यों लफ्ज़ ये मेरे बयान तुझे करते हैं...! क्यों मेरी अब हर ख्वाहिश सिर्फ तुम हो.. क्यों रब से मेरा दिल बस तुम्हे माँगता है,... क्यों रास्ते ये मेरे, तेरी मंज़िल ढूंढते हैं... क्यों कदम ये मेरे तेरे साथ चलना चाहते हैं.. क्यों अरमान ये मेरे तुझपर शुरू होकर तुझपर खत्म होना चाहते हैं... आखिर क्यों तुम मेरे  कुछ ना होते हुए भी सब कुछ हो!!

जश्न ए आजादी उनके नाम कर दें हम

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हमें आज़ादी तो 15 अगस्त 1947 को मिल गयी थी। मगर इस आज़ादी को कायम रखने में सबसे बड़ा योगदान अगर किसी का है तो वो हमारे फौजी भाइयों का। जो हमारे लिए बिना किसी संकोच के सीमा पर तैनात रहते हैं। मगर हमारे मन में उनके प्रति सम्मान कम होता जा रहा है। वो चंद पैसों की नौकरी करने फौज में नहीं जाते। वो तो बस देश के लिए मर मिटने का जज्बा लेकर फौज में जाते हैं। वो हमसे कुछ नहीं मांगते , पर क्या उनको इतना सम्मान नहीं दे सकते हम , जिससे वो फौजी होने पर अपने आप पर गर्व महसूस कर सकें। फौजी भाइयों को समर्पित है ये कविता... महफूज इस देश में जिसकी वजह से हम चैन की साँस ले रहे जिसकी वजह से हम खुले आसमाँ में जी रहे जिसकी वजह से हम आज़ादी का जश्न मना रहे जिसकी वजह से हम सरहदों पर हमारे लिए   लड़ते  जो रात दिन फ़िक्र ना जान की जख्म सहते जो रात दिन अब तक जिया उन्होंने हमारे लिए अब जरा उनके लिए तो जी लें हम जरा सी फ़िक्र तो उनकी अब मिल कर कर लें हम बिन सोचे बिन समझे जान की बाजी लगा जाते जो आज दिन है उन जांबाजों का  आज दिन है उन वीरो...

मुस्कुराती है ज़िन्दगी, कभी दरवाजे खोल कर तो देखो

मुस्कुराती है ज़िंदगी,  कभी दिल के दरवाजे खोल कर तो देखो!.. क्या कहती है जिंदगी, कभी उसकी गुनगुनाहट सुनकर तो देखो!!... बहुत कह ली, बहुत सुन ली, दूसरों की दुःख की कथाएँ कभी किसी दुखियारे का सहारा बन कर तो देखो!!... क्या मज़ा सिर्फ किसी कहानी को पढ़ने का... कभी किसी कहानी का हिस्सा बन कर तो देखो... बहुत आसान है किसी पर गुस्सा होना, कभी किसी के मुस्कुराने की वजह तो बन कर देखो!!... क्यों परेशान हो? दुःख की कलियों से.. भरी पड़ी है खुशियों की फुलवारी, कभी अपने मन की आँखे खोल कर तो देखो!!... बहुत लोग हैं दुनिया में,  औरों की तरह कभी अपनी, अलग पहचान बना कर तो देखो!!... मुस्कुराती है जिंदगी,  कभी दिल के दरवाजे खोल कर तो देखो... क्या कहती है जिंदगी उसकी गुनगुनाहट सुन कर तो देखो!!...

रिश्ते दूर के ही सही

रिश्ते दूर के ही सही पर दिल के होने चाहिए बातें थोड़ी ही सही पर दिल को छूनी चाहिए खूबसूरती चेहरे में नहीं दिल में होनी चाहिए  चेहरे बिक जायें पर दिल नहीं बिकने चाहिए कभी अगर टूट भी जाये उम्मीद  पर हौसले कभी नही टूटने चाहिए टूट जाये अगर बातों का सिलसिला मगर दिल की डोर कभी नहीं टूटनी चाहिए।