हमसफर

छोड़ गए साथ हमसफर, जो किया करते थे वादा ज़िन्दगी भर का।
ज़िन्दगी रह गई इक कोरे कागज़ सी, जिस पर केवल बूंदें ही रह गई स्याहि की।
वक्त के खाली पन्नौं पर लिखकर अलविदा, समय दे गए लौट कर आने का, समय तो आ ही गया पर कम्बक्खत  सांसों के मोतियों की कमी रह गई।
अब केवल आईना है,अपने अक्क्ष के बिना।
इक खाली जिंदगी  है सांसों के बिना।
बस अब लम्हों के कीमती मोती हैं, लौटकर आने की आशाओं के बिना।

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