नेता जी की झंडी है खाली

नेता जी की झंडी है खाली
ना जाने अब करेंगे किसकी सवारी

बहुत सवारी करी नेता जी ने
ना जाने अब किसकी बारी

हर थाली का चखा स्वाद
हर पार्टी का किया गुणगान

जिधर देखा पलड़ा भारी
उधर ही नेता जी की सवारी

आज इनके तो कल उनके
पर गद्दी नहीं जाने दी खाली

नेता जी की झंडी है खाली
देखते हैं अब किसकी बारी।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

मुस्कुराती है ज़िन्दगी, कभी दरवाजे खोल कर तो देखो

भैया मेरे वादा करो मुझसे

जश्न ए आजादी उनके नाम कर दें हम