जश्न ए आजादी उनके नाम कर दें हम

हमें आज़ादी तो 15अगस्त 1947 को मिल गयी थी। मगर इस आज़ादी को कायम रखने में सबसे बड़ा योगदान अगर किसी का है तो वो हमारे फौजी भाइयों का। जो हमारे लिए बिना किसी संकोच के सीमा पर तैनात रहते हैं। मगर हमारे मन में उनके प्रति सम्मान कम होता जा रहा है। वो चंद पैसों की नौकरी करने फौज में नहीं जाते। वो तो बस देश के लिए मर मिटने का जज्बा लेकर फौज में जाते हैं। वो हमसे कुछ नहीं मांगते, पर क्या उनको इतना सम्मान नहीं दे सकते हम, जिससे वो फौजी होने पर अपने आप पर गर्व महसूस कर सकें। फौजी भाइयों को समर्पित है ये कविता...



महफूज इस देश में
जिसकी वजह से हम

चैन की साँस ले रहे
जिसकी वजह से हम

खुले आसमाँ में जी रहे
जिसकी वजह से हम

आज़ादी का जश्न मना रहे
जिसकी वजह से हम

सरहदों पर हमारे लिए 
लड़ते जो रात दिन

फ़िक्र ना जान की
जख्म सहते जो रात दिन


अब तक जिया उन्होंने हमारे लिए
अब जरा उनके लिए तो जी लें हम

जरा सी फ़िक्र तो उनकी
अब मिल कर कर लें हम

बिन सोचे बिन समझे
जान की बाजी लगा जाते जो

आज दिन है उन जांबाजों का
 आज दिन है उन वीरों का

हैं जिनकी वजह से महफूज़ हम
हैं जिनकी वजह से आजाद हम

जब मना रहे थे चैन से त्योहारों को हम,
तब लड़ रहे थे वो हमारे लिए सीमा पर

जश्न ए आजादी उनके नाम कर दें हम...

आपको स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकमनाएं file:///C:/Users/ajay%20jawla/Downloads/google4ce9f87891d72037.html

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