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भैया मेरे वादा करो मुझसे

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तुमने ही  सिखाया हाथ पकड़ कर चलना हर जिद की पूरी, माना हर कहना मेरी हर परेशानी के सामने तुम खड़े रहे ताकि ना पड़े मुझे किसी दुःख को सहना भैया मेरे अपनी बहना की एक बात और सुनना  राखी में नहीं चाहिए मुझे कोई तोहफा ना गहना बस इतना सा वादा तुम मुझसे करना  ना पड़े किसी लड़की को किसी लड़के से डरना   मेरी  ही तरह करना उनकी तुम रक्षा क्योंकि वो भी है किसी भाई की बहना भैया मेरे वादा करो मुझसे  अब ना पड़ेगा किसी लड़की को  निर्भया की तरह मरना....

क्यों दिल ये मेरा बातें सिर्फ तेरी करता है

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क्यों दिल ये मेरा बातें सिर्फ तेरी करता है क्यों यादें ये मेरी बस याद तुझे करती है क्यों लफ्ज़ ये मेरे बयान तुझे करते हैं...! क्यों मेरी अब हर ख्वाहिश सिर्फ तुम हो.. क्यों रब से मेरा दिल बस तुम्हे माँगता है,... क्यों रास्ते ये मेरे, तेरी मंज़िल ढूंढते हैं... क्यों कदम ये मेरे तेरे साथ चलना चाहते हैं.. क्यों अरमान ये मेरे तुझपर शुरू होकर तुझपर खत्म होना चाहते हैं... आखिर क्यों तुम मेरे  कुछ ना होते हुए भी सब कुछ हो!!

जश्न ए आजादी उनके नाम कर दें हम

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हमें आज़ादी तो 15 अगस्त 1947 को मिल गयी थी। मगर इस आज़ादी को कायम रखने में सबसे बड़ा योगदान अगर किसी का है तो वो हमारे फौजी भाइयों का। जो हमारे लिए बिना किसी संकोच के सीमा पर तैनात रहते हैं। मगर हमारे मन में उनके प्रति सम्मान कम होता जा रहा है। वो चंद पैसों की नौकरी करने फौज में नहीं जाते। वो तो बस देश के लिए मर मिटने का जज्बा लेकर फौज में जाते हैं। वो हमसे कुछ नहीं मांगते , पर क्या उनको इतना सम्मान नहीं दे सकते हम , जिससे वो फौजी होने पर अपने आप पर गर्व महसूस कर सकें। फौजी भाइयों को समर्पित है ये कविता... महफूज इस देश में जिसकी वजह से हम चैन की साँस ले रहे जिसकी वजह से हम खुले आसमाँ में जी रहे जिसकी वजह से हम आज़ादी का जश्न मना रहे जिसकी वजह से हम सरहदों पर हमारे लिए   लड़ते  जो रात दिन फ़िक्र ना जान की जख्म सहते जो रात दिन अब तक जिया उन्होंने हमारे लिए अब जरा उनके लिए तो जी लें हम जरा सी फ़िक्र तो उनकी अब मिल कर कर लें हम बिन सोचे बिन समझे जान की बाजी लगा जाते जो आज दिन है उन जांबाजों का  आज दिन है उन वीरो...

मुस्कुराती है ज़िन्दगी, कभी दरवाजे खोल कर तो देखो

मुस्कुराती है ज़िंदगी,  कभी दिल के दरवाजे खोल कर तो देखो!.. क्या कहती है जिंदगी, कभी उसकी गुनगुनाहट सुनकर तो देखो!!... बहुत कह ली, बहुत सुन ली, दूसरों की दुःख की कथाएँ कभी किसी दुखियारे का सहारा बन कर तो देखो!!... क्या मज़ा सिर्फ किसी कहानी को पढ़ने का... कभी किसी कहानी का हिस्सा बन कर तो देखो... बहुत आसान है किसी पर गुस्सा होना, कभी किसी के मुस्कुराने की वजह तो बन कर देखो!!... क्यों परेशान हो? दुःख की कलियों से.. भरी पड़ी है खुशियों की फुलवारी, कभी अपने मन की आँखे खोल कर तो देखो!!... बहुत लोग हैं दुनिया में,  औरों की तरह कभी अपनी, अलग पहचान बना कर तो देखो!!... मुस्कुराती है जिंदगी,  कभी दिल के दरवाजे खोल कर तो देखो... क्या कहती है जिंदगी उसकी गुनगुनाहट सुन कर तो देखो!!...