इक देश मेरा...
इक देश मेरा भूखा है।
कहीं बाढ़ है तो कहीं सूखा है।
काम के बोझ तले,
कहीं मासूमियत का साथ छूटा है।
मेरा 'स्वर्ग' भी मुझसे आज रूठा है।
कहता है हर बच्चा वहाँ का,
जा तेरा देश बड़ा ही झूठा है।
छींन कर मुझसे मिट्टी मेरी,
दूर बेठा कोई हँस रहा है।
मासूमियत का इक नक़ाब,
बर्बरता को आज ढक रहा है।
यह देश मेरा कुछ कह रहा है।
देश मेरा कुछ कह रहा है।।
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