क्यों दिल ये मेरा बातें सिर्फ तेरी करता है


क्यों दिल ये मेरा बातें सिर्फ तेरी करता है
क्यों यादें ये मेरी बस याद तुझे करती है


क्यों लफ्ज़ ये मेरे बयान तुझे करते हैं...!
क्यों मेरी अब हर ख्वाहिश सिर्फ तुम हो..


क्यों रब से मेरा दिल बस तुम्हे माँगता है,...
क्यों रास्ते ये मेरे, तेरी मंज़िल ढूंढते हैं...


क्यों कदम ये मेरे तेरे साथ चलना चाहते हैं..
क्यों अरमान ये मेरे तुझपर शुरू होकर तुझपर खत्म होना चाहते हैं...


आखिर क्यों तुम मेरे  कुछ ना होते हुए भी सब कुछ हो!!

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